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Wednesday, 11 July 2018

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वेदों की भाषा संस्कृत, सभी भाषाओं की माता है। संस्कृत और तमिल दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है।

वेदों की भाषा संस्कृत, सभी भाषाओं की माता है। संस्कृत और तमिल दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है।

सनातन भारत, सनातन धर्म की जननी है । भारत की मातृ भाषा है संस्कृत। हमारे वेद और उपनिषदों की उत्पत्ती संस्कृत भाषा में हुई है। भगवान शिवजी ही संस्कृत और तमिल भाषा के जनक है ऐसा माना जाता है। हमारे पुराणॊं के अनुसार दोनों भाषा की उत्पत्ती शिवजी के डमरू से ही हुई थी। वैदिक संस्कृत सभी भाषा की माता है और दुनिया की  लगभग सभी भाषाओं की जननी है। वेद अपौरुषेय हैं यानी इसे किसी व्यक्ति ने नहीं बनाया अपितु संसार में पहले से ही वेदों का अस्तित्व था। वेद और उपनिषद, गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से एक युग से दूसरे युग में प्रवहित हॊती रही। आपको बतादें की ऋषी कश्यप की पत्नियों में से अदिति देवी के पुत्र “देव” या “सुर” नाम से जाने जाते थे। जबकि दिती के पुत्र “दानव” या “असुर” कहे जाते थे। सुर और असुरों के बीच का संबंध अच्छा नहीं हुआ करता था और वे अलग अलग दिशा में रहा करते थे। सुर गण उत्तर में निवास करते थे वहीं असुर गण दक्षिण में निवास करते थे। संस्कृत को देव भाषा कहा जाता है। जबकि तमिल को द्रविड भाषा कहते हैं।

शॊधकर्ता और इतिहासकार मानते हैं कि तमिल दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है किन्तु तमिल वैदिक संस्कृत से पुरानी नहीं है। कविरत्न कालिदास का अभिज्ञान शाकुंतला शास्त्रीय संस्कृत में लिखा गया है जो वैदिक संस्कृत के बाद आया था। लेकिन जानकार कहते हैं कि तमिल भाषा शास्त्रीय संस्कृत से भी पुरानी है। तमिल को दक्षिण भारत में ले जाने का श्रेय अगत्स्य ऋषि को जाता है। रामयाण में भी अगत्स्य ऋषि का उल्लेख है जो दक्षिण भारत में वेदों को ले गये थे। हम देख सकते हैं कि दक्षिण भारत में आज भी वेद-उपनिषदों और सनातन संस्कृती को संभाल कर रखा गया है। जब की उत्तर भारत में मुगलों और अंग्रेज़ों के शासन में पुराणॊं को अत्याधिक क्षती पहुंची है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अफ़्रिका के केमरून में तमज़िग्ट नामक भाषा है जो तमिल का विकृत रूप है! यहूदियों की हीब्रू भाषा की उत्पत्ती भी तमिल से ही हुई थी। माना जाता है कि बेबिलॊनियन के लिए तमिल “असुर” भाषा थी यानी असुरों द्वारा बोली जाने वाली भाषा। भारत और अफ़्रीका को जोड़नेवाली ‘कुमारी कंडम’ के माद्यम से तमिल अन्य देशों में प्रसारित हुई थी ऐसा जानकार कहते हैं। माना जाता है कि तमिल संस्कृति और सभ्यता लगभग 50,000 साल पुरानी है। आर्यावर्त में उत्तर भारत में लोग “संस्कृत” को आम बॊली के रूप में उपयॊग करते थे तो वहीं दक्षिण भारत के लॊग “तमिल” को बॊल चाल की भाषा के रूप में उपयोग करते थे। दक्षिण भारत का अफ्रीका से संबंध होने के कारण तमिल यहां से दुनिया के अन्य देशों में पहुंच गया।

नागपट्टणम में समुद्र के नीचे 23 मीटर की गहराई पर Tarangambadi- Poompuhar तट पर एक मानव निर्मित संरचना है जो इस बात की पुष्टि करता है कि दक्षिण भारत का आफ़्रीका के इथियॊपिया से संबंध था। पुरातात्विक और भूवैज्ञानिक साक्ष्यों से अनुमान लगाया जा सकता है कि संगम वंश करीब 11,000 वर्ष पूर्व अस्तित्व में था। एक खोज तो यह भी पुष्टि करती है कि मयन नागरिकता के पूर्वज तमिल लोग थे। मयन लोग तमिल की ही बॊली का उपयॊग किया करते थे। माना जाता है कि आफ़्रिका के लगभग सभी भाषाएं तमिल से ही निकली है। 50,000 BC पूर्व ही कुमारी कंडम में एक अद्भुत नागरिकता हुआ करती थी जो संस्कृती, साहित्य, कविता और पुराण के ज्ञान को अधिक महत्व देती थी। माना जाता है 16,000 BC में यह पूरा द्वीप प्राकृतिक विकॊप के कारण समुद्र में डूब गया।

इन सारे तत्यों से हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि तमिल दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है लेकिन वैदिक संस्कृत से पुरानी नहीं है। तमिल और संस्कृत के बीच भाषा प्रेरित झगड़ा करवाने का श्रेय द्राविड राजनीतिक पार्टियों को जाता है। उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीयों को भी भाषा के आधार में बांट ना भी इसी घृणित राजनीती का ही एक भाग है। मुगलों और अंग्रेज़ों ने भारत के इतिहास से जुड़े सभी साक्ष्यों को नष्ट कर हमें आपस में लड़वाया है। उसके बाद आये राजनीतिक दलों ने भी आग में घी डाला है। संस्कृत हो, तमिल हो, गुजराती हो या असामी देश की सभी भाषा हमारी ही है। भाषा के नाम पर झगड़ा करने से हमारी धरॊहर से हम अनभिज्ञ रह जायेंगे। वास्तव में संस्कृत को राष्ट्र भाषा घोषित करना उचित था लेकिन राजनीती के चलते भारत अपनी ही मातृ भाषा से वंचित रह गया है।

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